एमडीयू का बड़ा इनोवेशन: बिना लेज़र के बनेगी ऑस्मोटिक टैबलेट
- ‘नॉच्ड टूलिंग’ तकनीक को मिला डिज़ाइन पेटेंट
एमडीयू का बड़ा इनोवेशन:
- ‘नॉच्ड टूलिंग’ तकनीक को मिला डिज़ाइन पेटेंट
टीएचटी न्यूज, रोहतक :
रोहतक | महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय (एमडीयू) ने फार्मास्यूटिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। विश्वविद्यालय के फार्मास्यूटिकल साइंसेज विभाग के शोधार्थी किरपा शंकर तिवारी ने प्रो. मुनीष गर्ग के मार्गदर्शन में विकसित नॉच्ड टूलिंग तकनीक को भारतीय पेटेंट कार्यालय द्वारा डिज़ाइन पेटेंट प्रदान किया गया है। यह तकनीक महंगी लेज़र ड्रिलिंग को बदलकर किफायती तरीके से ऑस्मोटिक टैबलेट्स में छिद्र बनाने का नया समाधान पेश करती है। डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रो. हरीश दूरजा के सहयोग से किए गए इस शोध कार्य को उद्योग और शैक्षणिक जगत में एक बड़ी प्रगति माना जा रहा है।
कैसे काम करती है नई तकनीक?
प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर प्रो. मुनीष गर्ग के अनुसार, विशेष ‘नॉच्ड टूल्स’ को मौजूदा टैबलेट कंप्रेशन मशीनों में बिना किसी अतिरिक्त बदलाव के फिट किया जा सकता है।
इन टूल्स की मदद से टैबलेट्स में सटीक और समान छिद्र स्वतः बन जाते हैं — जिससे अलग से लेज़र ड्रिलिंग मशीन की आवश्यकता पूरी तरह खत्म हो जाती है। इससे उत्पादन लागत घटेगी, बैच प्रोडक्शन तेज होगा, और टैबलेट निर्माण प्रक्रिया अधिक कारगर व इंडस्ट्री-फ्रेंडली बन जाएगी।
इंडस्ट्री के लिए नए अवसर
शोधार्थी किरपा शंकर तिवारी का कहना है कि यह तकनीक दवा कंपनियों और मशीन निर्माताओं दोनों के लिए बड़े अवसर खोलती है। यदि उद्योग अपने कंप्रेशन उपकरणों में इन नॉच्ड टूल्स को अपनाते हैं, तो ऑस्मोटिक टैबलेट्स का उत्पादन सस्ता, तेज, और व्यावसायिक रूप से अधिक सक्षम हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि टूल डेवलपर्स, मशीन निर्माताओं और फार्मा उद्योग के साथ सहयोग कर इस तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है, जिससे बाजार में किफायती दवाएँ आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी। एमडीयू का यह नवाचार भारतीय फार्मा सेक्टर में इंडिजिनस फार्मा टेक्नोलॉजी को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
------------